Abstract
भारत आदिकाल से ही विश्व पटल पर अपने ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति के आधार पर जाना गया है । मानव का वर्तमान स्वरूप भी सतत विकसित हुए विज्ञान की जैविक शाखा के विकास को दर्शाता है। भारत की शिक्षण, शोध, अन्वेषण एवं ज्ञान परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपराओं में से एक है। इसमें विज्ञान, गणित, आयुर्वेद, योग, दर्शन, साहित्य, कला, संस्कृति और सामाजिक चिंतन का विशाल भंडार निहित है। आधुनिक डिजिटल युग में इस ज्ञान के संरक्षण, विकास और वैश्विक प्रसार में डिजिटल पुस्तकालयों और सूचना संसाधनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। भारत की ज्ञान परंपरा में वेद, संगीत, शिल्प, उपनिषद, पुराण, बौद्ध और जैन साहित्य के साथ-साथ आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, भास्कराचार्य जैसे विद्वानों के वैज्ञानिक योगदान शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक प्रौद्योगिकी, तकनीकी , संचार को विकसित करने में आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों एवं मनीषियों जैसे डॉ॰ (सर) जगदीश चन्द्र बसु, डॉ. सी. वी. रमण, डॉ. होमी जहाँगीर भाभा, डॉ. विक्रम साराभाई,बीकेएस अयंगर, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, प्रो. सतीश धवन जैसे विद्वानों एवं वैज्ञानिकों क