Notice Board :

Call for Paper
Vol. 7 Issue 6

Submission Start Date:
June 01, 2026

Acceptence Notification Start:
June 10, 2026

Submission End:
June 25, 2026

Final MenuScript Due:
June 30, 2026

Publication Date:
June 30, 2026
                         Notice Board: Call for PaperVol. 7 Issue 6      Submission Start Date: June 01, 2026      Acceptence Notification Start: June 10, 2026      Submission End: June 25, 2026      Final MenuScript Due: June 30, 2026      Publication Date: June 30, 2026




Volume VII Issue III

Author Name
Dilip Kumar Gupta
Year Of Publication
2026
Volume and Issue
Volume 7 Issue 3
Abstract
आधुनिक अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।वैश्वीकरण, प्रतिस्पर्धा तथा तकनीकी विकास के कारण जहां एक ओर आधुनिक सेवा विपणन में ग्राहक-केन्द्रित दृष्टिकोण को विशेष महत्व दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर नैतिकता, विश्वास और दीर्घकालीन ग्राहक संबंधों का अभाव एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रहा है। भारतीय सभ्यता एवं दर्शन में सेवा, धर्म, सत्य, विश्वास, करुणा, लोककल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्य सदियों से व्यवहार में रहे हैं। भारतीय संस्कृति में सेवा को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, अपितु सामाजिक एवं नैतिक कर्तव्य माना गया है।आधुनिक सेवा विपणन में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR),सतत विपणन एवं समावेशी विकास इसी सोच का आधुनिक रूप हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य आधुनिक सेवा विपणन में भारतीय मूल्यों की प्रासंगिकता का अध्ययन कर यह विश्लेषण करना है कि किस प्रकार ये मूल्य सेवा गुणवत्ता, ग्राहक संतुष्टि एवं ग्राहक निष्ठा को सुदृढ़ करते हैं।मुख्यतः द्वितीयक समंको पर आधारित इस अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि भारतीय मूल्य आधुनिक सेवा विपणन को अधिक नैतिक, विश्वासनीय और
PaperID
2026/IJEASM/3/2026/001

Author Name
Archana Pancholi
Year Of Publication
2026
Volume and Issue
Volume 7 Issue 3
Abstract
यदि भारत भूमि की ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत का विंहगावलोकन किया जाए तो ज्ञात होता है कि संपूर्ण विश्व पटल पर भारत की वैदिक संस्कृति में प्रकृति दर्शन अद्भुत और अद्वितीय है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भारत भूमि प्राचीन और पवित्र भूमि है जहां दर्शन और आध्यात्मिक की धाराओं में संपूर्ण विश्व में एक अलग ही पहचान है राम- कृष्ण की इस पावन धरा पर वेदों, पुराणों, उपनिषदों , ग्रंथों, महा ग्रंथों में प्रकृति संचेतना का उदाहरण मिलता है। तुलसी काव्य और श्री रामचरितमानस में वन और पर्यावरण के महत्व और प्रकृति दर्शन भली-भांति मिलता है। भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में यह न केवल वनस्पति शास्त्र विषय के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन है बल्कि पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषय में यह प्रकृतिविदों और पर्यावरणविदों के लिए बहु उपयोगी साबित होगा। श्री रामचरितमानस में विभिन्न प्रसंगों के द्वारा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का उल्लेख किया है प्रकृति के अभाव में काव्य निष्प्राण है काव्य या महाकाव्य को सजीवता प्रकृति के द्वारा ही प्रदान की जाती है।
PaperID
2026/IJEASM/3/2026/002

Author Name
Sonam Sahu
Year Of Publication
2026
Volume and Issue
Volume 7 Issue 3
Abstract
भौतिकी विज्ञान की एक मूलभूत शाखा है, जो पदार्थ और ऊर्जा का अध्ययन स्थान (आकाश) और समय के संदर्भ में करती है। यद्यपि आधुनिक भौतिकी हाल के कुछ शताब्दियों में एक औपचारिक अनुशासन के रूप में विकसित हुई है, फिर भी प्राकृतिक घटनाओं पर चिंतन मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरणों से ही विद्यमान रहा है। वेद, जिन्हें भारतीय सभ्यता के सबसे प्राचीन साहित्यिक अभिलेख माना जाता है, मानव अनुभव, विचार और प्रकृति के साथ उसके संबंध का एक समग्र विवरण प्रस्तुत करते हैं। संस्कृत मूल शब्द “विद्” से व्युत्पन्न, जिसका अर्थ “जानना” है, वेद ज्ञान की एक एकीकृत दृष्टि को अभिव्यक्त करते हैं, जिसमें अवलोकन, चिंतन और दार्शनिक अन्वेषण का समन्वय दिखाई देता है। यह शोधपत्र भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित भौतिकी की वैचारिक आधारभूमि का अन्वेषण करता है, विशेष रूप से वेदों, उपनिषदों तथा वैशेषिक और सांख्य जैसे दार्शनिक तंत्रों के संदर्भ में। इसमें पदार्थ, गति, आकाश, समय, कारणता, प्रकाश, ध्वनि और परमाणुवाद से संबंधित प्राचीन भारतीय अवधारणाओं का अध्ययन किया गया है, विशेष रूप से कणाद द्वारा प्रतिपादित परमाणु सिद्धांत पर बल दिया गया है। तु
PaperID
2026/IJEASM/3/2026/003

Author Name
Sudhanshu
Year Of Publication
2026
Volume and Issue
Volume 7 Issue 3
Abstract
भारत आदिकाल से ही विश्व पटल पर अपने ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति के आधार पर जाना गया है । मानव का वर्तमान स्वरूप भी सतत विकसित हुए विज्ञान की जैविक शाखा के विकास को दर्शाता है। भारत की शिक्षण, शोध, अन्वेषण एवं ज्ञान परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपराओं में से एक है। इसमें विज्ञान, गणित, आयुर्वेद, योग, दर्शन, साहित्य, कला, संस्कृति और सामाजिक चिंतन का विशाल भंडार निहित है। आधुनिक डिजिटल युग में इस ज्ञान के संरक्षण, विकास और वैश्विक प्रसार में डिजिटल पुस्तकालयों और सूचना संसाधनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। भारत की ज्ञान परंपरा में वेद, संगीत, शिल्प, उपनिषद, पुराण, बौद्ध और जैन साहित्य के साथ-साथ आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, भास्कराचार्य जैसे विद्वानों के वैज्ञानिक योगदान शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक प्रौद्योगिकी, तकनीकी , संचार को विकसित करने में आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों एवं मनीषियों जैसे डॉ॰ (सर) जगदीश चन्द्र बसु, डॉ. सी. वी. रमण, डॉ. होमी जहाँगीर भाभा, डॉ. विक्रम साराभाई,बीकेएस अयंगर, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, प्रो. सतीश धवन जैसे विद्वानों एवं वैज्ञानिकों क
PaperID
2026/IJEASM/3/2026/004